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महाराष्ट्र-तेलंगण आंतरराज्यीय करार: जनतेच्या मुलभूत हक्कांचे व देशाच्या पर्यावरणीय कायद्यांचे उल्लंघन

काल दि. २३ ऑगस्ट २०१६ रोजी महाराष्ट्र-तेलंगण आंतरराज्य मंडळाच्या आज झालेल्या पहिल्याच बैठकीत तुमडीहेटी, मेडिगट्टा आणि चनाखा-कोर्टा बॅरेज या तीन बॅरेजचे काम सुरू करण्यासाठी दोन्ही राज्यांदरम्यान करार करण्यात आले. कमालीची गोपनीयता पाळत केल्या गेलेल्या या कराराबद्दलची अत्यंत मोघम टिप्पणी प्रसार माध्यमांना  पाठविण्यात आली. तुमडीहेटी, मेडिगट्टा आणि चनाखा-कोर्टा बॅरेजमुळे महाराष्ट्र राज्यातील यवतमाळ, चंद्रपूर आणि गडचिरोली जिल्ह्यातील 30 हजार हेक्टर जमीन सिंचनाखाली येणार असून उपसा सिंचन योजनांना बारमाही शाश्वत पाण्याचा स्त्रोत उपलब्ध होणार आहे असे या टिप्पणीत नमूद केले आहे. तसेच या प्रकल्पामुळे महाराष्ट्रातील एकही गाव, गावठाण बुडणार नाही, नदीकाठच्या गावांना पुराचा धोका नाही व हे प्रकल्प दोन्ही राज्यासाठी फायदेशीर ठरणारे असून उपसा सिंचन योजनांना बाराही महिने पाणी मिळणार आहे असा दावा करत या भागातील नागरीकांनी या प्रकल्पांना विरोध करु नये असे आवाहनही महाराष्ट्राच्या मुख्यमंत्र्यांनी त्यांनी केले. Continue reading “महाराष्ट्र-तेलंगण आंतरराज्यीय करार: जनतेच्या मुलभूत हक्कांचे व देशाच्या पर्यावरणीय कायद्यांचे उल्लंघन”

Dams · Ganga

दो बाॅधों की कहानीः क्या बिहार की अप्रत्याशित बाढ़ एक टाली जा सकने वाली मानव जनित त्रासदी है?

बाणसागर बाॅध, सोन नदी, गंगा नदी और पटना को दर्शाता मानचित्र

21 अगस्त 2016 की सुबह, गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए, पटना में 50.43 मीटर पर पहुॅच गया। जिससे पटना में गंगा नदी अपने पहले के उच्चतम बाढ़स्तर 50.27 मीटर से 16 सैंटीमीटर ऊपर बह रही थी। 22 अगस्त 2016 तक पानी का जलस्तर गंगा नदी के किनारे तीन अन्य स्थानों पर उच्चतम बाढ़स्तर को पार कर गया। जिसका विवरण निम्न हैः-

       स्थान                        22.08.2016 को उच्चतम बाढ़स्तर                      पुराना उच्चतम बाढ़स्तर
बलिया उत्तरप्रदेश                         60.30 मीटर                                     60.25 मीटर (14 सितंबर 2003)
हाथीदाह, बिहार                           43.17 मीटर                                      43.15 मीटर (07 अगस्त 1971)
भागलपुर बिहार                           34.55 मीटर                                      34.50 मीटर (05 सितंबर 2013)

इस तरह से हम देखते हैं कि पटना में उच्चतम बाढ़ का रिकार्ड तोडने के बाद, अब यह बाढ़ गंगा नदी के किनारे बसे बिहार और उत्तरप्रदेश के अन्य इलाकों में पहुॅच रही है। यहाॅ यह बात उल्लेखनीय है कि बिहार में अब तक वर्षा औसत से 14 प्रतिशत कम हुई है। सवाल यह उठता है कि इसके बावजूद गंगा में रिकार्ड तोडने वाली बाढ़ क्यों आयी?

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