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Two years of Uttarakhand Flood Disaster of June 2013: Why is state & centre gambling with the Himalayas, the Ganga & lives of millions?

Its two years since Uttarakhand faced its worst ever flood disaster during June 15-17, 2013. We remember such tragedies to ensure that we learn the necessary lessons. So that in future such tragedies are not repeated or their dimensions are reduced. One of the enduring debates since that the Uttarakhand tragedy has been about the role of existing and under construction hydropower projects in increasing the proportions of the disaster.

A lot of water has flown down the Ganga in these two years, so let us revisit the important milestones of that debate. Within two months of the disaster, a bench led by Justice Radhakrishnan gave an order on Aug 13, 2013[1], asking the Union Ministry of Environment, Forests & Climate Change (MoEF&CC) to appoint an independent panel to assess the role played by existing and under construction hydropower projects in the disaster. Continue reading “Two years of Uttarakhand Flood Disaster of June 2013: Why is state & centre gambling with the Himalayas, the Ganga & lives of millions?”

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श्रीनगर जलविद्युत परियोजना पर 2013 की तबाही के दो सालों बाद की रिपोर्ट मई 2015

Guest Blog by विमलभाई (bhaivimal@gmail.com)

उत्तराखंड में अलकनंदा नदी पर 330 मेगावाट की श्रीनगर जलविद्युत परियोजना बनाने वाली जी0वी0के0 बांध कम्पनी द्वारा लापरवाही से श्रीनगर बांध की मिट्टी डंप नहीं कि गई होती तो जून 2013 में नदी का पानी केवल घरों एंव अन्य जगहों पर आता किन्तु मलबा नहीं आता। लोग अभी तक दो सालों के बाद भी मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप से परेशान एवं अस्त-व्यस्त ना होते।

वैसे श्रीनगर बांध निर्माण में पूर्व से ही काफी कमियां रही हैं तथा इसके पर्यावरणीय पहलुओं पर लोग इलेक्ट्रोनिक व प्रिंट मीडिया के माध्यम से कहते रहे हैं। जी0वी0के0 कम्पनी पर मुकदमें भी हुये, जिनमें से कुछ अभी भी चल रहे हैं। जी0वी0के0 कम्पनी की लापरवाही मीडिया व कई व्यक्तियों द्वारा प्रश्न उठाये गये जो लगातार सच साबित हुये हैं। आज स्थिति यह है कि बांध के खिलाफ केस भी चालू है और बांध कंपनी ने विद्युत उत्पादन भी करना आरंभ कर दिया है।

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